Thursday, July 10, 2008

Imtihaan......

भाग्य- सागर के तूफ़ान में एक लहर ऐसी आयी,
जो कि शांत सी ज़िंदगी में आंधी बन बस गयी,
पर उस आंधी ने सिखलाया सार जीवन का,
हर वक्त खुशी नहीं है, कुछ वक्त है गम का,
पर उस गम की पुड़िया में भी बन्द हैं कुछ खुशी के पल,
जिनके सहारे गम का आज बनता खुशियों का कल,
अगर ना होते गम,तो क्या मज़ा फिर जीने में,
एक अजीब सी ही कशिश है आंसूं पीने में,
एक अलग ही सुकून है, वक्त से लड़कर अपनी जगह बनाने में,
जो ना हो ये लड़ाई,
तो कुछ सीख ना हमने जीवन से पायी,
अगर आए तुम्हारे जीवन में कोई गम,
तो समझो उस पीड़ा को तुम,
जो तुम्हे सीखाती है जीवन जीने के गुण,
कभी दुख को होने दो ना इतना हावी कि हंसना भूल जाओ,
आज तक ना कभी ऐसा हुआ है , ना होगा,
कि रात के बाद सूरज ना उगा हो,
अत: हे मनुष्य, खुद को बना सशक्त इतना,
कि हर आंधी से लड़े, हर तूफ़ान को पछाड़े,
और हर उस लड़ाई के बाद देखे,
एक किरण उस सुबह की,
जो लाए अपनी हवा के साथ खुशबू खुशी की।।।

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